असम में बाढ़ से अब भी छह जिलों के 6.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है. बारिश थमने से जलस्तर घट रहा है और राहत कार्य तेज हुए हैं. हालांकि, सैकड़ों गांव जलमग्न हैं और हजारों परिवार अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.
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शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि क्या इस देश में महिलाओं को शांति से जीने का अधिकार नहीं?
'मेरे भाई ने अस्पताल के दरवाज़े पर दम तोड़ दिया क्योंकि बिस्तर नहीं था. ये लोकतंत्र नहीं मुर्दातंत्र है, जिसमें लैपटॉप मिलता है, दंगा मिलता है, इंटरनेट मिलता है पर इलाज नहीं मिलता!'
बाबरी विध्वंस मामले में गवाह वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान बता रहे हैं कि कैसे टालमटोल, सुस्ती और न्याय तंत्र की उदासीनता के चलते यह केस 25 सालों से लटका हुआ है.
हम सब मौत से वाक़िफ़ हैं. अपने अजीज़ लोगों को खोने की तकलीफ हम सबने सही है. हमने न भरे जा सकने वाले खालीपन को महसूस किया है. लेकिन इस मौत का एहसास अलग है. यह एक बेक़सूर की मौत है. यह नफ़रत से हुई मौत है. आप इसे जयसिंहपुर में देख सकते हैं.
'आंदोलन के सारे गांधीवादी-सत्याग्रही तरीक़े चूक जाने के बाद अगर तमिलनाडु के किसान हथियार उठा लें तो उसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा?'
केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इन दवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है. इस साल मार्च में इन दवाओं पर टेस्ट किए गए थे.
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