कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: बीसवीं सदी में यूरोप में नाज़ियों के युद्ध और नरसंहार के समय जैसी चुप्पी यूरोप में छा गई थी, वर्तमान चुप्पी, उसका एक नया दुखद और शर्मनाक संस्करण है. स्वयं भारत ने इस बीच अपना जो नैतिक अवमूल्यन किया है वह समझना मुश्किल है.